सबसे पहले 1921 में दयाराम साहनी के नेतृत्व में पश्चिमी पंजाब के हरप्पा नामक स्थल पर उत्खनन में हड़प्पा सभ्यता का पता चला था। सर्वप्रथम हड़प्पा पर खुदाई होने के कारण ही इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया। यह एक शहरी सभ्यता थी। इसे कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है। इस सभ्यता की अनुमानित तिथि 2350 ईसा पूर्व से लेकर 1750 ईसा पूर्व माना गया है।
सिंधु घाटी सभ्यता के खोजकर्ता दयाराम साहनी माने जाते हैं। इसका विस्तार लगभग 1500 स्थलों पर पाया गया है।
सिंधु घाटी सभ्यता के कुछ प्रमुख नगर इस प्रकार हैं। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, सुतकांगेडोर, कालीबंगा, रंगपुर, रोपड़, लोथल, आलमगीरपुर, बनवाली, धोलावीरा, कोटदीजी, चंधुदारो।
मोहन जोदड़ो
मोहन जोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता का एक मुख्य नगर था, यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लड़काना जिले में अवस्थित है इसकी खोज सर्वप्रथम 1922 में रखाल दस बनर्जी ने की थी। सिंधी भाषा में मोहनजोदड़ो शब्द का अर्थ मृतकों का टीला होता है। यह सिंधु नदी के तट पर स्थित था। मोहनजोदड़ो से एक मुहर का साक्ष्य मिला है, जिस पर तीन मुख वाला एक पुरुष ध्यान की मुद्रा में बैठा हुआ है उसके सिर पर तीन सिंग है, उसके बाएं और एक गैंडा और एक भैसा तथा दाईं और एक हाथी और एक बाघ है। इसे पशुपति शिव का रूप माना गया है, जॉन मार्शल ने इन्हें आद्यशिव बताया। एक अन्य मोहड़ कुबेर वाले बैल की आकृति बनी हुई है।
मोहनजोदड़ो से एक विशाल स्नानागार तथा अन्नागार भी प्राप्त हुआ है।
हड़प्पा
हड़प्पा पाकिस्तान के मोंटगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर अवस्थित सिंधु घाटी सभ्यता का एक शहर था। इसकी खोज दयाराम साहनी ने की थी। हड़प्पा से स्वास्तिक के चिन्ह के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। हड़प्पा से छह अन्नागार मिले हैं जो ईटों से निर्मित थे इसके फर्श के दरारों में गेहूं और जौ के दाने के प्रमाण मिले थे। हड़प्पा से एक मोहर प्राप्त हुआ है जिसमें एक सींग वाला पशु का चित्र है।
कालीबंगा
कालीबंगा राजस्थान के हनुमानगढ़ में है। यह घग्घर नदी के तट पर स्थित था इसकी खोज वीके थापर व बृजवासी लाल ने की थी। कालीबंगा से जूते हुए खेत के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं यहां पर दो अलग-अलग तरह के फसलो की खेती की जाती थी। कालीबंगा से अग्नि कुंड प्राप्त हुई है।
लोथल
लोथल को लघु हड़प्पा या लघु मोहनजोदड़ो के नाम से जाना जाता है यहां पर हड़प्पा कालीन एक बंदरगाह था। इसकी खोज 1957 58 में रंगनाथ राव ने की थी। यह गुजरात के अहमदाबाद जिले के भगवा नदी के तट पर स्थित एक शहर था। लोथल से एक अग्निकुंड के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। लोथल में मृदभांड पर चित्रकारी के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इस हड़प्पा कालीन शहर से अन्य पीसने वाली चक्की नाव के साथ हाथी के दांत का पैमाना आदि भी प्राप्त हुए हैं।