कोरोना वायरस के कारण cbse और अन्य बोर्ड के 12th एग्जाम कैंसल होने के बाद विद्यार्थियों की सबसे बड़ी शंका है की अंक किस आधार पर मिलेंगे और उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन में क्या कोई दिक्कत आएगी।
कोरोना वायरस के कारण सीबीएसई ने 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा कर दी है। इसके बाद आई सी एस ई आर सी आई एस सी भी बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर चुके हैं। बोर्ड के अधिकारियों को परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए निर्देश दिए गए हैं, बताया गया है कि सीबीएसई के अधिकारियों की एक कमेटी अब इससे संबंधित मापदंड तैयार करेगी। फिलहाल 12वीं की परीक्षाओं को लेकर बनी हुई कश्मकश खत्म हो गई है लेकिन इसके साथ ही उच्च शिक्षा यानी कॉलेज में एडमिशन की शंका पैदा हो गई है।
कैसे मिलेगा यूनिवर्सिटीज में एडमिशन
अभी तक यूनिवर्सिटीज के अलग-अलग कोर्सेज में दो तरह से प्रवेश मिलता है एक कटऑफ के आधार पर यानी 12वीं के अंकों के आधार पर कट ऑफ लिस्ट तैयार होती है और उसके अनुसार एडमिशन मिलता है। दूसरा पेशेवर कोर्सेज में प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर इसमें 12वीं के नंबरों की वेटेज भी हो सकती है और नहीं भी। लेकिन एंट्रेंस एग्जाम में मिले अंकों के आधार पर कोर्स में एडमिशन मिलता है। जैसे jee, neet, पत्रकारिता BBA इत्यादि।
जानकार मानते हैं कि 12वीं की परीक्षाओं को की परीक्षाओं को रद्द करना दसवीं की परीक्षाओं को रद्द करने से अलग है,दसवीं के बाद स्कूल में एडमिशन होता है लेकिन 12वीं के बाद हायर एजुकेशन के लिए चयन होता है । यह देखना भी जरूरी हो जाता है कि परीक्षाएं रद्द होने का उच्च शिक्षा में प्रवेश पर क्या असर पड़ेगा इस संबंध में सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन अशोक गांगुली कहते हैं कि मौजूदा स्थितियों में सबसे ज्यादा जरूरी है मूल्यांकन का सही तरीका निकालना। ये ना सिर्फ परीक्षा में अंक देने को लेकर है बल्कि कॉलेज में एडमिशन के संदर्भ में भी है।
मार्किंग पैटर्न क्या होगा ? किस आधार पर दिए जायेंगे अंक
अशोक गांगुली बताते हैं केवल प्री बोर्ड के आधार पर परीक्षा के नतीजे घोषित करेंगे तो वह सही मूल्यांकन नहीं होगा इसमें कई रास्तों और संयोजन पर काम करना पड़ेगा। इंटरनल असेसमेंट के 1 से ज्यादा आधार हो सकते हैं जैसे स्टूडेंट के 11वीं कक्षा में जो नतीजे आए हैं उसके कुछ प्रतिशत नंबर लिए जा सकते हैं 12वीं क्लास में कुछ प्री बोर्ड परीक्षाएं दी गई है उससे कुछ प्रतिशत ले सकते हैं तीसरा यह बच्चों ने जो छमाही परीक्षाएं या यूनिट टेस्ट दिए होंगे उन्हें आधार बिंदु बनाया जा सकता है। इंटरनल असेसमेंट के लिए चार-पांच टूल का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
मौजूदा समय में रिजल्ट घोषित करना ही एक मात्र मकसद नहीं है बल्कि प्रमाणिक विश्वसनीय और सही मूल्याकन कि जरूरत है ताकि बच्चो के साथ न्याय हो सके। 12वीं कक्षा में कई बच्चे प्रिबोर्ड, टेस्ट या प्रोजेक्ट पर पर ज्यादा ध्यान नहीं देते वो अंतिम परीक्षा की तैयारी करते हैं । ऐसे में ये छात्र अंकों में पिछड़ सकते हैं, इसीलिए जानकार किसी एक बिंदु को आधार बनाने के बजाय कई बिंदुओं पर जोर देते हैं ।
Cbse परीक्षा के नतीजे आने के बाद विश्वविद्यालयों में एडमिशन के पड़ाव पर भी चुनौतियां कम नहीं होंगी। अब विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को भी विचार करना है कि उनके यहां प्रवेश में क्या मापदंड अपनाए जाएं क्योंकि संभव है कि पारंपरिक मापदंड इस बार उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाए।
इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी अपना रुख किया है दिल्ली विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष पीसी जोशी ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि इस असाधारण स्थिति को देखते हुए बिना गुणवत्ता से समझौता किए प्रवेश प्रक्रिया को अनुकूल बनाया जाएगा उन्होंने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट को भी एक अच्छा विकल्प बताया है फिलहाल यह उलझन हर जगह है कि प्रवेश अंको पर आधारित हो या उसके लिए कोई और तरीका ही अपनाया जाय ।
चुनौतियां सिर्फ नतीजे देने के तरीके को लेकर ही नहीं है बल्कि इसमें होने वाली गड़बड़ियों को रोकने की भी है अशोक गांगुली कहते हैं कि बोर्ड को यह सोचना चाहिए कहीं ऐसा ना हो कि बच्चों के नंबरों में बहुत ज्यादा उछाल आ जाए यह मूल्यांकन स्कूल में किया जाएगा तो नंबर में बढ़ोतरी हो सकती है हमें इसके लिए ऐसी मापदंड लाने होंगे जिससे इसे रोका जा सके अशोक गांगुली इससे बचने के कुछ तरीके बताते हैं पिछले साल की क्लास में विभिन्न विषयों में जो औसत अंक रहे हो उन्हें रिज़ल्ट लिए के आधार बनाया जा सकता है, इसके आधार पर दो तीन या पांच अंक प्लस या माइनस किए जा सकते हैं,
स्टूडेंट्स ने 2 साल पहले ही जो दसवीं की परीक्षा दी थी उनके अंको को आधार बनाया जा सकता है, इसमें ऊपरी सीमा तय की जा सकती है
भारत में पढ़ने वाले बच्चे की केवल देश में ही उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं करते कई बच्चे विदेशी विश्वविद्यालयों में भी एडमिशन लेना चाहते हैं,
ऐसे में 12वीं की परीक्षाओं में हुए बदलाव का उस पर क्या असर हो सकता है अशोक गांगुली का का कहना है कि इसमें कोई परेशानी नहीं आएगी जुलाई के शुरूआत तक नतीजे आ सकते हैं और बच्चे विदेशों में आवेदन दे सकते हैं वहां इन नतीजों की स्वीकार्यता होगी ।
इन मुश्किलों और चुनौतियों के बीच जानकार इसे एक मौका भी मानते हैं अशोक गांगुली कहते है, की यह अभिशाप से मिला वरदान है इससे कटऑफ की गला काट प्रतियोगिता होती थी वो कम हो जाएगी।
हो सकता है कि कटऑफ अब 100 तक ना पहुंचे लेकिन हमें आगे का रास्ता भी तैयार करना होगा । हमें एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें भविष्य में फिर से ऐसी कोई चुनौती आए तो उससे आसानी से निपटा जा सके।