भारत में बना पहला स्वदेश मशीन पिस्टल अस्मी

 

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय सेना ने मिलकर भारत की पहली स्वदेशी पिस्तौल बनाया है। इस पिस्तौल का नाम अस्मी (ASMI) रखा गया है। अस्मि नाम का अर्थ है गर्व आत्मसम्मान और कठिन परिश्रम।

इस पिस्टल को नागपुर के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद बंसल ने तैयार किया है। इसकी प्रोडक्शन लागत लगभग ₹50000 है। इसका रेंज 100 मीटर है।
यह भारत की 9 एमएम की पहली स्वदेशी मशीन पिस्तौल है।

इसका डिजाइन मध्यप्रदेश के महू में स्थित इन्फेंट्री स्कूल और डीआरडीओ के पुणे के आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान ने मिलकर तैयार किया है। इसे रिकॉर्ड 4 महीने के अंदर ही विकसित किया गया है। यह रक्षा बलों में 9 एमएम वाली पिस्तौल की जगह लेंगी। इसको इजराइल की बनी ऊंची श्रृंखला की तोपों की श्रेणी में रखा गया है।

इस पिस्तौल में 8 इंच बैरल और 33 राउंड उच्च क्षमता वाली मैगजीन है जिसका वजन 2 किलोग्राम से कम है। 13 जनवरी 2021 को आर्मी के इनोवेशन इवेंट में इसका प्रदर्शन किया गया।
इसका प्रयोग केंद्र तथा राज्य सरकार की पुलिस संगठनों के साथ-साथ वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी तथा पुलिसिंग में किया जा सकता है। इसके निर्यात की भी संभावनाएं हैं। सशस्त्र बलों में हेवी वेपन डिटैचमेंट कमांडरो टैंक तथा विमान कर्मी और ड्राइवर/डिस्पैच राइडर, रेडियो रडार ऑपरेटरों, नजदीकी लड़ाई, चरमपंथ विरोधी तथा आतंकवाद विरोधी कार्यवाही में पर्सनल हथियार के रूप में इसकी क्षमता काफी अधिक है।

DRDO के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

स्थापना 1958
मुख्यालयनई दिल्ली
आदर्श वाक्यबलस्य मुलं विज्ञानं
चेयरमैन जी सतीश रेड्डी
कुल प्रयोगशाला 52