नोनिया विद्रोह : बिहार में स्वतंत्रता संघर्ष का एक प्रमुख विद्रोह

नोनिया विद्रोह

बिहार में नोनिया शोरा इकट्ठा करने तथा तैयार करने का काम करते थे,इसका उपयोग बारूद बनाने के लिए किया जाता था। शोरा एक प्रकार की नमकीन मिट्टी होती थी जिसे रेह भी कहा जाता था। बिहार में शोरा मुख्य रूप से पूर्णिया, सारण, हाजीपुर और तिरहुत क्षेत्रों में पाया जाता था। पलासी की लड़ाई के दौरान बिहार शोरा उद्योग का प्रमुख केंद्र बन गया था। मीर जाफर के सत्ता में आने के बाद उसने बिहार में शोरा के व्यापार पर अंग्रेजों को एकाधिकार दे दिया। इससे डच, पुर्तगाली और फ्रांसीसी व्यापारी अंग्रेज से नाराज हो गए। फ्रांसीसियों ने इसकी शिकायत दिल्ली दरबार में कर दी। कंपनी और नोनिया के बीच आसामी व्यापारी होते थे जो एक मन शोरा के लिए 12 से 15 आना ही नोनिया को देते थे। जबकि वे इसी 1 मन शोरा को 2 से चार रुपए में कंपनी को देते थे। अंग्रेज शोरा को white gold (सफेद सोना )कहते थे।

एकाधिकार होने के बाद अंग्रेज इसे औने पौने दामों में खरीद में लगे। इससे नाराज होकर नोनिया समाज ने विद्रोह कर दिया। यह विद्रोह 1770 से 1800 तक चला।